1 अप्रैल से लागू हो रहे हैं ये 7 नए नियम, जानिए आपकी जेब पर कैसे पड़ेगा असर

rules or changes that are going to be effective from 1 april 2019

वित्त वर्ष 2018-19 खत्म होने में अब कुछ ही दिन बाकी हैं. इसके बाद 1 अप्रैल से नया वित्त वर्ष शुरू हो जाएगा. इसके साथ ही लागू हो जाएंगे कुछ नए नियम.

वित्त वर्ष 2018-19 खत्म होने में अब कुछ ही दिन बाकी हैं. इसके बाद 1 अप्रैल से नया वित्त वर्ष शुरू हो जाएगा. इसके साथ ही लागू हो जाएंगे कुछ नए नियम. ये नियम विभिन्न मोर्चों पर आम आदमी को प्रभावित करेंगे. फिर चाहे वह लोन की EMI हो, घर खरीदना हो, इनकम टैक्स हो या ट्रेन से सफर करना. इन नए नियमों में बजट 2019 को पेश करने के दौरान हुए एलान भी शामिल हैं. आइए बताते हैं नए वित्त वर्ष से लागू होने जा रहे ऐसे ही 7 नियमों या यूं कहें बदलावों के बारे में-

इनकम टैक्स के मोर्चे पर हुए बदलाव होंगे लागू

बजट 2019 के दौरान इनकम टैक्स के मोर्चे पर की गई घोषणाएं 1 अप्रैल 2019 से लागू होने जा रही हैं. इसके तहत टैक्स रिबेट की सीमा बढ़ाए जाने के चलते 5 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स फ्री हो जाना, स्टैंडर्ड डिडक्शन को 40000 रुपये से बढ़ाकर 50000 रुपये किया जाना, बैंक या डाकघरों में जमा पर आने वाला 40000 रुपये तक का ब्याज टैक्स फ्री होना, किराए पर TDS की सीमा को 1.80 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.40 लाख रुपये किया जाना, किसी व्यक्ति के दूसरे सेल्फ ऑक्यूपाइड मकान को भी टैक्स फ्री किया जाना, एक मकान को बेचकर मिले पैसों से दो मकान खरीदने पर अब दोनों मकानों पर टैक्स से छूट का लाभ मिलना शामिल है.

संयुक्त PNR

नए वित्त वर्ष से इंडियन रेलवे संयुक्त पैसेंजर नेम रिकॉर्ड (PNR) जारी करेगा. इसके तहत अब रेल यात्री एक यात्रा के दौरान एक के बाद दूसरी ट्रेन में सफर करेंगे तो उन्हें संयुक्त PNR मिलेगा. PNR एक यूनीक कोड होता है, जिससे ट्रेन और यात्री की जानकारी मिलती है.
नए नियम के आने से अगर यात्रियों की पहली ट्रेन लेट हो जाती है और इसके चलते उनकी अगली ट्रेन छूट जाती है तो वे बिना कोई पैसे दिए आगे की यात्रा रद्द कर सकेंगे. अभी एक यात्रा के लिए 2 ट्रेन बुक करने पर यात्रियों के नाम पर 2 PNR नंबर जनरेट होते हैं. नए नियम लागू होने के बाद दोनों PNR को लिंक कर दिया जाएगा. इससे रिफंड मिलना भी आसान हो जाएगा.

रेपो रेट घटते ही घट जाएगी लोन की EMI

दिसंबर 2018 में RBI ने घोषणा की थी कि वह अप्रैल 2019-20 से पॉलिसी रेट कट में एक्सटर्नल बेंचमार्किंग का नियम लागू करेगा. इस नियम के तहत लोन्स में ‘फ्लोटिंग’ (परिवर्तनीय) ब्याज दरें रेपो रेट या गवर्मेंट सिक्योरिटी में निवेश पर यील्ड जैसे बाहरी मानकों से संबद्ध की जाएंगी. इसका फायदा यह होगा कि RBI द्वारा पॉलिसी रेट कम किए जाते ही कस्टमर्स के लिए लोन भी तुंरत सस्ते हो जाएंगे.
फिलहाल बैंक अपने कर्ज पर दरों को प्रिन्सिपल लेंडिंग रेट (PLR), बेंचमार्क प्रिन्सिपल लेंडिंग रेट (BPLR), बेस रेट और मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) जैसे आंतरिक मानकों के आधार पर तय करते हैं. एक्सटर्नल बेंचमार्किंग का नियम आने के बाद रिजर्व बैंक द्वारा की जाने वाली कटौती का असर जल्द दिखेगा. अभी रिजर्व बैंक के फैसलों का मार्केट में ट्रांसमिशन होने में वक्त लगता है और असर उतना नहीं दिखता है, जितना दिखना चाहिए.
इस दिशा में पहला कदम बढ़ाते हुए SBI ने सेविंग डिपॉजिट और अल्पकालिक कर्ज के लिए ब्याज दरों को रिजर्व बैंक की Repo Rate से जोड़ने की घोषणा कर दी है. यह बदलावा 1 मई 2019 से प्रभावी होगा.

सस्ता घर

GST काउंसिल ने अंडर कंस्ट्रक्शन फ्लैट पर जीएसटी 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी और सस्ते घरों यानी अफोर्डेबल हाउसिंग पर GST रेट को 8 फीसदी से घटाकर 1 फीसदी कर दिया है. यानी अब ये घर पहले के मुकाबले सस्ते हो जाएंगे. नई दरें 1 अप्रैल 2019 से लागू होंगी.

हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के साथ मिलेंगी गाड़ियां

सभी वाहन निर्माताओं के लिए अप्रैल 2019 से हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) अनिवार्य होगी. यानी 1 अप्रैल 2019 से मार्केट में आने वाले सभी वाहनों में पहले से ही हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट लगी होगी. ऐसे में कस्टमर्स को इसे पाने के लिए परिवहन विभाग में लाइन लगाकर इंतजार नहीं करना होगा. वाहन निर्माता कंपनियों को अब गाड़ी को बेचने से पहले डीलर्स को इसे गाड़ी पर लगाकर ग्राहकों को देना होगा.

नए GST रिटर्न फॉर्म

नए सरल GST रिटर्न फॉर्म 1 अप्रैल 2019 से जारी हो जाएंगे. जुलाई 2018 में सेंट्रल बोर्ड आॅफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स (CBIC) ने ड्राफ्ट जीएसटी रिटर्न फॉर्म ‘सहज’ और ‘सुगम’ को लोगों की टिप्पणी के लिए जारी किया था. ये फॉर्म GSTR-3B (summary sales return form) and GSTR-1 (final sales returns form) की जगह लेंगे.

अब NPS भी होगी पूरी तरह टैक्स फ्री

अगले वित्त वर्ष से NPS में निवेश पूरी तरह टैक्स फ्री होगा. इसकी वजह है कि NPS को PPF की तरह EEE यानी एग्जेंप्ट-एग्जेंप्ट-एग्जेंप्ट का दर्जा दिए जाने को मंजूरी मिल चुकी है. इसके अलावा NPS के तहत सरकार की ओर से दिया जाने वाला योगदान बढ़ाकर 14 फीसदी कर दिया गया है. अभी तक यह 10 फीसदी है. हालांकि कर्मचारियों का न्यूनतम योगदान 10 फीसदी ही रहेगा. NPS में बदलाव एक अप्रैल 2019 से लागू होंगे.
EEE दर्जे का अर्थ है कि उस सेविंग्स में लगाया जाने वाला पैसा, उससे आने वाला ब्याज और मैच्योरिटी पीरियड पूरा होने पर मिलने वाला अमाउंट तीनों पर टैक्स नहीं लगता है. अभी तक यह यह बेनिफिट केवल PPF में था. अभी NPS के तहत कर्मचारी रिटायरमेंट के वक्त कुल जमा कोष में से 60 फीसदी राशि निकालने का पात्र है. शेष 40 फीसदी राशि पेंशन योजना में चली जाती है. अभी तक NPS के अंशधारक को योजना में जमा राशि में से रिटायरमेंट के समय 60 फीसदी राशि की निकासी में से 40 फीसदी कर मुक्त थी, जबकि शेष 20 फीसदी पर कर लिया जाता है. लेकिन अब यह पूरी राशि टैक्स फ्री होगी.

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